ओम प्रकाश राजभर की चुनावी रणनीति: बेटे अरविंद और अरुण के लिए मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार

ओम प्रकाश राजभर की चुनावी रणनीति: बेटे अरविंद और अरुण के लिए मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार

Om Prakash Rajbhar Electoral Strateg

Om Prakash Rajbhar's Electoral Strateg

लखनऊ। Om Prakash Rajbhar's Electoral Strateg, एनडीए सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष व मंत्री ओम प्रकाश राजभर अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव के लिए बेटे अरविंद और अरुण राजभर के लिए चुनावी मैदान तैयार करने में जुट गए हैं।

इसके लिए वे पिछले करीब तीन महीने से सपा के गढ़ आजमगढ़ जिले में डेरा डाले हुए हैं। उनकी निगाहें इस जिले की अतरौलिया और दीदारगंज विधान सभा क्षेत्र पर लगी हैं। इनमें से एक पर खुद और दूसरे पर किसी एक बेटे को चुनाव लड़ाने की तैयारी में हैं। राजभर खुद इस बात को प्रचारित करने में लगे हैं कि अगला विधान सभा चुनाव वह अतरौलिया से लड़ेंगे।

लगातार आजमगढ़ में उनकी उपस्थिति उनके इस बात को बल भी दे रहा है। राजभर के मुताबिक अतरौलिया विधान सभा क्षेत्र का जातीय समीकरण उनके अनुकूल है। आजमगढ़ प्रदेश का वह जिला है, जहां वर्ष 2022 विधान सभा चुनाव में भाजपा को सभी 10 सीटों पर हार मिली थी।

माना जा रहा है कि अतरौलिया से चुनाव लड़ने पर राजभर गाजीपुर जिले की अपनी जहूराबाद सीट छोड़ सकते हैं, हालांकि अभी इस मुद्दे पर वह गोलमोल जवाब दे रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, उनकी तैयारी जहूराबाद सीट से पुत्र अरविंद अथवा अरुण में से किसी एक को चुनाव लड़ाने की है। बेटों के लिए उनकी दूसरी पसंंद आजमगढ़ जिले का दीदारगंज और बलिया जिले का सिकंदरपुर विधान सभा क्षेत्र बना हुआ है।

वह यह मानकर चल रहे हैं कि वर्ष 2022 विधान सभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए भाजपा नेतृत्व को अतरौलिया और दीदारगंज सीट उन्हें देने में कोई आपत्ति नहीं होगी।

बेटों के लिए राजभर जहूराबाद के साथ ही आजमगढ़ जिले की दीदारगंज, बलिया जिले की रसड़ा व सिकंदरपुर तथा वाराणसी जिले की शिवपुर विधान सभा क्षेत्र पर भी निगाहें लगा रखी हैं। राजभर वर्ष 2017 से ही बड़े बेटे अरविंद को चुनाव लड़ाते आ रहे हैं।

वर्ष 2017 विधान सभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के तहत अरविंद बलिया जिले के बांसडीह विधान सभा क्षेत्र, वर्ष 2022 विधान सभा चुनाव में सपा गठबंधन के तहत वाराणसी जिले के शिवपुर विधान सभा क्षेत्र तथा वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव में घोसी सीट से एनडीए के प्रत्याशी थे। तीनों चुनावों में उन्हें हार मिली।